श्रीमाँ

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श्रीअरविंद

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Sunday, 30 July 2017

Saturday, 23 April 2016

आज आपसे बात करता हूँ.
विश्व विस्फोट के उस कगार पर है ,जिससे इसको बचाना बहुत जरुरी है.
और विश्व को केवल भारत की चेतना ही बचा सकती है.
और ये है श्रीअरविंद की अतिमानसिक चेतना
यानि अतिमानव
यानि मानव से आगे की प्रजाति
यानि कोई पहला अतिमानव
तो क्या वो जन्म ले चुका है?
अगर आपको पता हो तो मुझे बताएं ..

RAVIDUTT MOHTA, INDIA

Tuesday, 13 December 2011

SUN DAUGHTER SAVITRI''S VISION

यह धरती गोल-गोल क्यों घूम रही है? कभी आपने यह सोचा है ? हमने अंतरिक्ष की बहती नदी में छलांग लगाकर यह देखा है कि हमारे प्यारे अंतरिक्ष में घूमते हुए सभी ग्रह ठीक उसी प्रकार के भंवर हैं -जैसे भंवर हमारी धरती की तेज बहती नदियों में आते हैं..
                            ये भंवर इसलिए आते हैं ..क्योंकि अंतरिक्ष में हो रहे महाप्रवाह के मध्य एक केन्द्रीय प्रवाह भी है ..जोकि उस महाप्रवाह के सामानांतर पर अंदर ही अंदर बहता रहता है ..इस केन्द्रीय प्रवाह का स्वभाव है कि प्रत्येक अवस्था को अपने साथ आगे ले जाने के लिए तैयार करना .. राजी करना .
                             सो यह केन्द्रीय प्रवाह कुछेक MOMENT अंतरिक्ष  की उस सुप्त स्थति और अवस्था में ठिठक कर रुक जाता है . इस कारण महाप्रवाह का गुरुत्वाकर्षण उस स्थति और अवस्था में एक वर्तुलगति पैदा कर देता है ..परिणामस्वरुप या तो नए ग्रहों का निर्माण होता है ..या फिर किसी नए BLACKHOLE का जन्म होता है ..
                              आपको मैं यह भी बताता चलूँ कि अंतरिक्ष में स्थित सभी ब्लैकहोल्स ही अंतरिक्ष के महाफैलाव में बिखरे ग्रहों ,नक्षत्रों ,निहारिकाओं ,चन्द्रमंडलों ,और सौरमंडलों के आदि बीज हैं ..
                              इस लिए इस तथ्य को आप जान लें कि जहाँ भी गति वर्तुल है ..वहां -वहां अंतरिक्ष का केन्द्रीय महाप्रवाह सक्रिय है ..और नए अंतरिक्ष का उत्खनन वहां चल रहा है ..और इसके परिणामस्वरूप हमको अंतरिक्ष की पौषक पहन कर धरती से बातचीत करनी पड़ती है ..आज मेरी धर्मपत्नी का जन्म दिवस है ..सो आप सभी विश्वनिवासियों का आशीर्वाद चाहता हूँ ...
                                       
                                              -- रविदत्त मोहता ,भारत  
                            

Sunday, 11 December 2011

DEATH AND SUPERMAN

       मैं माफी चाहता हूँ कि इन दिनों कुछ व्यस्त रहा . सो आपसे मुलाकात नहीं कर सका . THE GREAT WAIT OF SUPERMAN ..पुस्तक की POST कुछेक दिनों बाद आरंभ कर दूंगा ..पर आज आपसे कुछ ओर कहना चाहता हूँ .
        मृत्यु इस धरती का डरावना सत्य है . मृय्यु से मुक्ति सभी की इच्छा है . इस पर हमारे प्राचीन ऋषियों ने बहुत काम किया है .पाश्चात्य जगत के वैज्ञानिक भी इस पर बहुत काम कर रहें हैं . लेकिन मृत्यु पर विजय असंभव है . कारण इतना ही है कि यह एक मानसिक बीमारी है ...जो मानव की समझ तक ही सिमित है . अतिमानव मूलतः अपनी आत्मा के अनुभव से जन्म लेगा . अतः उसके लिए शरीर इतनी ही अहमियत रखेगा -जितनी की हमारे लिए कोई पेंट  या पायजामा रखता है . . अब क्या कभी आपने सुना है कि किसी मकान की मृत्यु हो गयी ?
         किसी 'गिलास' की मृत्यु हो गयी ?
         चाय के कप की मृत्यु हो गयी ?
         या घर के दरवाजे की मृत्यु हो गयी ?
          क्यों  नहीं सुना ...? क्यूंकि जिन चीजों के मैं नाम ले रहा हूँ ..वे पहले से ही मानव दिमाग द्वारा मृत मान ली गयी है .इस लिए इनकी मृत्यु पर धरती में न तो कोई विलाप है ..और न ही कोई संवाद है !
          पर महान यह शरीर चूँकि अजर और अमर ''आत्मा'' की पदार्थ रुपी पौशाक है ...इसलिए इस पर संवाद ही संवाद है .पार्थिव शरीर की धड़कन ने धरती पर यह अफवाह फैला दी है कि उसकी मृत्यु क्यों हो रही है ? 
          शरीर की शिकायत वाजिब है ...क्योंकि हमारा शरीर हमारे [ यानि हम आत्मा ] की अजरता और अमरता के साथ लगभग १०० वर्षों तक रहता है . इस कारण यह भी हमारी आत्मा की अमरता के स्वभाव में जीना चाहता है .
          मांग वाजिब है ..परन्तु इसके लिए मानव शरीर को यथा अग्नि , वायु , आकाश , जल और पृथ्वी जैसे पार्थिव तत्वों का अतिक्रमण करके ''आत्मतत्व'' के पराकाश में प्रवेश करना होगा ...परन्तु अभी तक इसके लिए यह शरीर तैयार नहीं है . यह अभी भी ''नारी शरीर'' में ही प्रवेश करने को २४ घंटें उत्तेजित रहता है .....
                                              -- रविदत्त मोहता , भारत