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Friday, 28 October 2011

ART OF BIENG MOVEMENT

आज अभी भारतवर्ष में रात्री के दो बजे हैं .मैं एक आत्मप्रेरना से उठ बैठा हूँ ....और यह पोस्ट लिखने बैठ गया हूँ ...  मैं देख रहा हूँ कि मुझे हमारे महान पूर्वज सुदूर अन्तरिक्ष के झरोंखों से झाँक कर यह कह रहें हैं कि हम अब धरती पर रहना सीख लें ...वरना सन २०१२ से जो MENTAL DISORDER पूरी धरती पर होने वाला है ..वह बहुत  ही भयानक होगा ...मैं देख रहा हूँ कि अभी कुछेक वर्षों से भारतवर्ष में मेरे आदरणीय कुछ सन्यासियों ने और समाजसेवियों ने राजनेतिक व्यवस्था के खिलाफ तथा सामाजिक कुव्यवस्था के खिलाफ ...जैसे भर्ष्टाचार आदि के खिलाफ एक मुहिम चला दी है ...विशेषकर मैं आदरणीय श्रीअन्नाहजारे जी , श्रदेय बाबारामदेव जी और श्री श्री रविशंकर जी के नामों का उल्लेख करना चाहूंगा ..पर मैं इनके प्रयासों के तरीकों से सहमत नहीं हूँ ...कारण यह है कि जब कभी भी धरती के वायुमंडल में विरोधस्वरूप कोई स्वर उठता है ...तो वह स्वर कालजयी स्रजन करने की शक्ति खो देता है ...हम अगर गौर से देखे तो पायेंगे कि प्रक्रति के पाँचों महान तत्व यथा हवा ना तो अग्नि के खिलाफ धरती पर है ...न ही आकाश इस धरती के खिलाफ है ...और ना ही वायु धरती पर व्याप्त आध्यात्मिक शान्ति के खिलाफ है ...ये पाँचों महान तत्व बस अपने होनेपन को लेकर ईमानदार है ..लेकिन ये सभी एक दूसरे के खिलाफ नहीं है ..इसी कारण धरती पर हमारा जीवन अभी तक बना हुवा है ..मैं इसी विज्ञान को धरती को बचाए रखने के लिए आवश्यक मानता हूँ ...अतः धरती पर अब इसी महान आध्यत्मिक संक्रांति की सन २०१२ से परम आवश्यकता है ...हमें स्वर के इस महानविज्ञान को फिर नष्ट होती इस धरती को बचाए रखने के लिए लागू करना होगा ...यही अन्तरिक्ष के अंतराल के मध्य स्थित संविधान की हमसे मांग है ..यही ART OF BEING का मेरा सपना और लक्ष्य है ...क्योंकि धरती को आज क्रान्ति की नहीं बल्कि एक महान ''संक्रांति'' की आवश्यकता है .....                      -  रविदत्त मोहता    

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