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Saturday, 12 November 2011

SUPERMAN.........

आज मन बना है कि आपसे ''अतिमानव'' के बारे में कुछ और बातें करूँ ....भारतवर्ष के पूर्व अवतार श्रीकृष्ण ने भी SUPERMAN पर बहुत काम किया था .गीता के सारे अध्याय उस ''SUPERMAN'' को ''अर्जुन'' में से अंकुरित करने के मन्त्र ही थे ...जो उस समय के ''मानवश्रेष्ठ अर्जुन'' में विधमान थे ..इसलिए गीता में श्रीकृष्ण ने ''अर्जुन'' को कई बार.....'हे मनुष्यश्रेष्ठ अर्जुन' के नाम से संबोधित किया है ...पर ''डार्विन'' तक आते-आते ''SUPERMAN'' का अतिमानवी विचार एक नए शरीर की मांग करने लगा ...तब SCIENTIST DARVIN ने यह कहा कि मानव तो प्रकृति के एक क्रमिक विकास का परिणाम है ..EVOLUTION OF MAN की EQUATION वहीँ से प्रकाश में आयी..और सारे संसार ने इस विचार को स्वीकृति प्रदान की ...लेकिन दार्शनिक 'नीत्से' का 'अतिमानव' बहुत कूर हो जाता है ..नीत्से के मतानुसार वर्तमान मानव को कुचलने वाले किसी 'BIENG' का नाम 'SUPERMAN' है ..परन्तु इस अतिमानव को अन्तरिक्ष से धरती पर आने को आमंत्रित और मजबूर किया ..पांडेचेरी की श्रीमा और श्रीअरविंद ने ...'THIS WAS ON ACCOUNT OF SUPERAMENTAL FORCE AND SUPERAMENTAL PRAYER BY THEM ...परिणामस्वरूप 'अतिमानव' को अन्तरिक्ष से कूद कर वायुमंडल में प्रवेश करना पड़ा ..
              पाश्चात्यजगत में अतिमानव को शारीरिक रूप से बहुत शक्तिशाली बताया गया है .उसको आसमान में उड़ते हुए ...गायब होते हुए ..और कोई भी रूप धरते हुए बताया गया है ..परन्तु वास्तव में क्या 'अतिमानव' ऐसा ही है .....?     मानव तो यही चाहता है कि..अतिमानव उसकी मानसिक सरंचना के अनुकूल ही जन्म ले ..और कार्य करे ..लेकिन क्या कभी आपने यह सोचा है कि अतिमानव भला हमारी मानसिक धाराओं के अधीन होकर क्यों खुद की अनुकृति करेगा ..और अगर कोई ऐसा करता है.... तो वह अतिमानव कैसे हो सकता है ...?फिर तो वह भी 'मानव' की मानसिक श्रेणी में ही रूका हुआ एक 'आम मानव' रह जाता है ..तो अतिमानव कैसा है ,,,? आज उसके सबसे बारीक दरवाजे को खोल रहा हूँ ...अतिमानव मूलरूप से एक शक्तिशाली विद्युत् गति का CHAIN BLAST का लघुअन्तरिक्ष है ..इस कारण वह अन्तरिक्षपुत्र है ..पर वह मानवजाति के बीच रहते हुए अपने आदि और अनादि स्वभाव के कारण खुद को बहुत 'अकेला' और उदास पाता है..सौरमंडल की इस लघु आकाशगंगा में धरती नामक ग्रह में वह खुद को एक 'आदिमानव' की तरह भटकता हुआ पाता है ...किसी विराट प्रसव पीड़ा से गुजर रहे इस अतिमानव को हमारी  सहमती और प्यार की इसलिए आवश्यकता है ...क्योकि इसी आधार पर वह हमारे लिए सौरमंडल के सभी ग्रहों को अपनी वर्तुल और सर्पिल गतियों में बदलाव करने को राजी कर सकेगा ...परिणामस्वरूप धरती पर पसरीहुई इस भयंकर बीमारी 'DEATH' से मुक्त हो जायगी ...तो..GROW AHEAD...इस अतिमानव के बारे में अधिक जानने के लिए मेरी LATEST BOOK -'अतिमानव'. पढ़े ....यह पुस्तक आप EMAIL से भी प्राप्त कर सकते है ...मेरा ईमेल है ...raviduttmohta@gmail.com                      रविदत्त मोहता ...भारत .          

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